कोलंबो, 05 मार्च।
ईरान ने अपने युद्धपोत आईआरआईएस डेना पर हुए अमेरिकी हमले में मारे गए 90 नौसैनिकों के शवों को अंतिम संस्कार के लिए श्रीलंका से सौंपने का अनुरोध किया है। इस युद्धपोत पर 180 ईरानी नाविक सवार थे। अमेरिकी पनडुब्बी ने इसे निशाना बनाकर श्रीलंका के तट के पास डुबो दिया था। राहत अभियान चला रहे श्रीलंका ने बताया कि 90 शव प्राप्त हो चुके हैं, लेकिन संख्या बढ़ने की संभावना है।
श्रीलंका की सरकार ने पुष्टि की है कि एक अन्य ईरानी जहाज भी श्रीलंका में मौजूद है और उसने अपने जलक्षेत्र में लंगर डालने की अनुमति मांगी है। मृतकों के शव फिलहाल श्रीलंका के करापितिया स्थित राष्ट्रीय अस्पताल में रखे गए हैं। उप स्वास्थ्य मंत्री हंसाका विजेमुनि ने कहा कि मौजूदा सैन्य परिस्थितियों के कारण शवों को तुरंत ईरान भेजना संभव नहीं है।
श्रीलंका ने शवों की पोस्टमार्टम प्रक्रिया शुरू कर दी है और आगे की कार्रवाई के लिए ईरानी अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा है। बड़ी संख्या में शवों के लिए पर्याप्त कोल्ड स्टोरेज न होने के कारण अतिरिक्त रेफ्रिजरेशन यूनिट खरीदी जा रही है।
आईआरआईएस डेना बुधवार सुबह करीब 5:08 बजे श्रीलंका के निकट अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में डूब गया। उस समय जहाज पर लगभग 180 लोग सवार थे। अमेरिकी पनडुब्बी ने इसे निशाना बनाया। अंतरराष्ट्रीय समुद्री समझौतों के तहत श्रीलंका ने बचाव अभियान में 32 जीवित लोगों को बचाया, जिनका इलाज अभी करापितिया के राष्ट्रीय अस्पताल में जारी है।
ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में किसी जहाज को निशाना बनाने पर अमेरिका को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "अमेरिका ने ईरान के तट से 2,000 मील दूर समुद्र में जघन्य अपराध किया है।"
श्रीलंका सरकार ने भी पुष्टि की है कि एक अन्य ईरानी युद्धपोत उनके विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में मौजूद है। सरकार ने कहा कि राष्ट्रपति, सुरक्षा परिषद और मंत्रालय इस मामले से अवगत हैं और जहाज में सवार लोगों की सुरक्षा के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।
श्रीलंका संसद में मंत्री नलिंदा जयतिस्सा ने बताया कि आईआरआईएस डेना पर अमेरिकी हमले के बाद सुरक्षा के लिए दूसरा ईरानी पोत लंगर डालने की अनुमति चाहता है। सरकार ने इसे लेकर हर जरूरी कदम उठाने का आश्वासन दिया।



