भोपाल, 18 फरवरी।
मुख्यमंत्री डॉ यादव ने मुंबई क्लाइमेट वीक-2026 में शिरकत करते हुए कहा कि क्लाइमेट चेंज मानव अस्तित्व, आर्थिक स्थिरता और भविष्य की पीढ़ियों के लिए गंभीर चुनौती है। उन्होंने सतत् विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि ठोस और समयबद्ध समाधान पर काम करना आज की जरूरत है।
इस अवसर पर मध्य प्रदेश में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के विकास के लिए नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग और सिकोया क्लाइमेट फाउंडेशन के बीच एमओयू भी हुआ। मुख्यमंत्री ने निवेशकों को सहयोग और सुरक्षा का भरोसा देते हुए कहा कि राज्य और निवेशक मिलकर भारत को नवकरणीय ऊर्जा में आत्मनिर्भर बनाएंगे।
उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश देश के तेजी से विकास करने वाले राज्यों में अग्रणी है और 24 घंटे बिजली देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। जलवायु परिवर्तन का समाधान केवल एक सरकार या राज्य नहीं कर सकता, इसके लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग जरूरी है। उन्होंने स्वच्छ ऊर्जा के स्रोतों, हरित तकनीकों और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग पर बल दिया और जनता से ‘लाइफ स्टाइल फॉर एनवायरमेंट’ अपनाने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में हुए नवाचारों का जिक्र करते हुए बताया कि राज्य पहला है जिसने ईवी नीति बनाई, 300 मेगावाट 4 घंटे और 6 घंटे सौर-सह एनर्जी स्टोरेज परियोजनाओं सहित 24x7 नवकरणीय ऊर्जा बैटरी आधारित एनर्जी स्टोरेज परियोजनाओं पर काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट दुनिया का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट है और सांची देश की पहली सोलर सिटी बनी है।
मुख्यमंत्री ने निवेशकों से मध्य प्रदेश की तेजी से परिवर्तनकारी यात्रा में जुड़ने का आव्हान किया और कहा कि राज्य नवकरणीय ऊर्जा में भारत का हब बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। कार्यक्रम में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव, विश्व बैंक समूह से आईएफसी के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय निदेशक इमाद एन. फ़खौरी, सिकोया क्लाइमेट फाउंडेशन की निदेशक सीमा पॉल सहित देश-विदेश के पर्यावरण विशेषज्ञ और उद्योग जगत के प्रतिनिधि मौजूद थे।




