लखनऊ, 12 फरवरी।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में गुरुवार को किन्नर समाज का मुद्दा सदन में चर्चा का विषय बना। समाजवादी पार्टी के विधायक सचिन यादव ने कहा कि किन्नर समाज के लोगों को शिक्षा, राशनकार्ड, स्वास्थ्य और नौकरी जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने ट्रांसजेंडर कल्याण आयोग तो बना दिया है, लेकिन इसके अध्यक्ष, सचिव और उपाध्यक्ष पुरुष हैं, जिससे समाज को न्याय नहीं मिल पा रहा है।
प्रश्नकाल के दौरान उठे इस सवाल के जवाब में समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि यह लोकतंत्र के मंदिर में उठाया गया पहला सवाल है। उन्होंने बताया कि किन्नर समाज के बारे में सदन में कही गई बातें पूरी तरह सही नहीं हैं। सरकार ने कई कदम उठाए हैं और भविष्य में और भी उठाएगी।
मंत्री ने बताया कि 2014 में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण बनाम भारत संघ के जजमेंट से किन्नर समाज के अधिकारों की यात्रा शुरू हुई। थानों में अलग सेल बनाई गई है। किन्नर समुदाय के लोग स्कूल और विश्वविद्यालयों में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। कई लोग अपने पहनावे से अलग दिखते हैं, लेकिन अधिकतर मुख्यधारा में शामिल हैं। उनकी पहचान सुनिश्चित करने के लिए ट्रांसजेंडर कार्ड बनाए गए हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए आयुष्मान कार्ड उपलब्ध हैं। सरकार ट्रांसजेंडर महोत्सव का आयोजन करती है, जिसमें समाज से जुड़े विषयों पर चर्चा, परिचर्चा और फिल्में प्रदर्शित की जाती हैं। सरकार किन्नर समाज को मुख्यधारा में जोड़ने के लिए लगातार प्रयासरत है।


