काठमांडू, 11 मार्च।
नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम सरकार द्वारा रवि लामिछाने के खिलाफ संगठित अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों को वापस लेने के निर्णय को चुनौती देने वाली रिट याचिका को अंतिम सुनवाई के लिए पूर्ण पीठ के पास भेज दिया है। यह आदेश न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल और श्रीकांत पौडेल की संयुक्त पीठ ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद दिया।
अदालत ने कहा कि लामिछाने के खिलाफ आरोपों में संशोधन और मामलों को वापस लेने से जुड़ा मुद्दा अब पूर्ण पीठ के सामने अंतिम रूप से सुना जाएगा। यह निर्णय लामिछाने के कुछ कारोबारी साझेदारों पर भी लागू होगा, जिनमें जीबी राई और पूर्व डीआईजी छविलाल जोशी शामिल हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश त्रिपाठी ने बताया कि अदालत ने रिट याचिका को पूर्ण पीठ के पास भेजने का आदेश दिया है। इस याचिका में महान्यायाधिवक्ता सविता भंडारी द्वारा आरोप पत्र में संशोधन कर लामिछाने के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने के निर्णय को रोकने की मांग की गई थी।
लामिछाने के खिलाफ सहकारी ठगी, संगठित अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले देश की पांच अलग-अलग जिला अदालतों में दर्ज हैं। सरकार के निर्देश पर अटॉर्नी जनरल भंडारी ने 14 जनवरी को संगठित अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग के दो गंभीर आरोप वापस लेने का निर्णय लिया था।
हालांकि सहकारी ठगी का मामला अभी भी कायम है, लेकिन माना जा रहा है कि इससे लामिछाने की चुनावी संभावनाओं पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा। यदि संगठित अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप वापस लिए जाते हैं, तो चितवन-2 से चुनाव जीत चुके लामिछाने के लिए संसद में प्रवेश की कानूनी बाधाएँ कम हो जाएंगी। इसके विपरीत आरोप कायम रहते हैं, तो चुनाव जीतने के बावजूद वह सांसद के रूप में शपथ नहीं ले पाएंगे।
लामिछाने और उनके सहयोगियों के खिलाफ गोरखा मीडिया से जुड़े मामले वर्तमान में रुपन्देही, पोखरा, वीरगंज, चितवन और काठमांडू की जिला अदालतों में विचाराधीन हैं। पूर्ण पीठ में होने वाली सुनवाई इस पूरे मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है और इसका सीधा असर लामिछाने के संसदीय भविष्य पर पड़ेगा।



